कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी ने थामा कांग्रेस का हाथ, हार्दिक पटेल भी थे मौजूद

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कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी ने मंगलवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया।

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता कन्हैया कुमार एवं गुजरात से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने मंगलवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया। कन्हैया और मेवाणी शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह की जयंती के मौके पर कांग्रेस में शामिल हुए। इन दोनों ही युवा नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने के बारे में काफी दिनों से चर्चा चल रही थी। गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने हाल ही में कहा था कि दोनों नेता 28 सितंबर को कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

सुरजेवाला ने की दोनों नेताओं की तारीफ


इस मौके पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि दोनों युवा नेता किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘इन युवा नेताओं ने पिछले 7 सालों से देश में चल रही मोदी सरकार की नीतियों और हिटलरशाही के खिलाफ दलितों, पिछड़ों, शोषितों, गरीबों के लिए अपने-अपने तरीके से व्यापक संघर्ष किया है। हमारे इन साथियों को लगा कि इनकी आवाज तब और बुलंद हो पाएगी जब यह कांग्रेस और राहुल गांधी की आवाज में मिलकर एक और एक ग्यारह की आवाज बन जाएगी।’ बता दें कि कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी को बीजेपी व संघ के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने वाले तेज-तर्रार युवा नेताओं में गिना जाता है।

‘यदि कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा’

इस मौके पर कन्हैया कुमार ने कहा, ‘आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती है। मैं कांग्रेस पार्टी इसलिए जॉइन कर रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि कुछ लोग जो देश की सत्ता पर न सिर्फ काबिज हुए हैं, वे इसका इतिहास वर्तमान और भविष्य खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने इस देश की सबसे पुरानी पार्टी, सबसे लोकतांत्रिक पार्टी का दामन इसलिए थामा है, क्योंकि इस देश के लाखों-करोड़ों नौजवानों को लगने लगा है कि यदि कांग्रेस नहीं बची तो यह देश नहीं बचेगा।’

‘मैं कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल नहीं हुआ हूं’

कांग्रेस में शामिल होने के बाद जिग्नेश मेवाणी ने कहा, ‘जो कहानी गुजरात से शुरू हुई, उस कहानी ने पिछले 6-7 सालों में इस मुल्क में क्या उत्पात मचाया है, वह हम सबके सामने है। एक राष्ट्र के तौर पर हम एक अभूतपूर्व समस्या का सामना कर रहे हैं। ऐसा संकट इस मुल्क ने पहले कभी नहीं देखा। संविधान पर हमला हो रहा है, दिल्ली की सड़कों पर संविधान की प्रति को जलाया जाता है। हमारे आइडिया ऑफ इंडिया पर हमला है, हमारे देश के लोकतंत्र के ऊपर हमला हो रहा है। दिल्ली और नागपुर मिलकर इस देश में इतनी नफरत फैला रहे हैं कि भाई ही भाई का दुश्मन बन जाए। आइडिया ऑफ इंडिया को बचाने के लिए मैं अंग्रेजों को खदेड़ने वाली पार्टी कांग्रेस के मंच पर आपके साथ खड़ा हूं। हालांकि कुछ तकनीकी कारणों के चलते पार्टी जॉइन नहीं कर रहा।’



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