कर्म प्रधान देवता हैं शनिदेव, उपासना से मिलता है रोग मुक्त जीवन 

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शनिदेव कलयुग के न्यायाधीश हैं और लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। उन्हें ग्रह और देवता दोनों की उपाधि प्राप्त है। कलयुग के साक्षात भगवान का दर्जा उन्हें प्राप्त है। शनिदेव की उपासना से कठिन परिश्रम, अनुशासन, निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है। शनिदेव कर्म प्रधान देवता हैं और उनका न्याय निष्पक्ष होता है। 

शनिदेव को पूरे जगत का असाधारण देव माना जाता है। शनिदेव सूर्यदेव के पुत्र हैं और इनकी माता का नाम छाया है। शनिदेव को मंदा, कपिलाक्‍क्षा और सौरी नाम से भी जाना जाता है। शनिदेव भगवान शिव के परम भ‍क्‍त हैं। भगवान शिव की उपासना से ही उन्होंने नवग्रहों में स्थान पाया। हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। हनुमान जी की उपासना करने वाले जातकों को शनिदेव कभी नहीं सताते। शनिदेव की गति मंद है। इसी कारण एक राशि में वह करीब साढ़े सात साल तक रहते हैं। शनिदेव की उपासना से रोग मुक्त जीवन तथा आयु में वृद्धि होती है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। इस दिन तेल, काले तिल, काले कपड़े आदि का दान करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिवार को पीपल पर जल और तेल अर्पित करने और श्वान को भोजन कराने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिवार को काले रंग की वस्तुओं का दान करें।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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