क्या एक सस्ती और ‘यूनिवर्सल’ कोरोना वायरस वैक्सीन पर काम हो रहा है? जानिए बड़ी खबर

0
6
Facebook
Twitter
Pinterest
WhatsApp

एक प्रायोगिक कोविड-19 वैक्सीन संभावित तौर पर भविष्य के कोविड वेरिएन्ट्स समेत अन्य कोरोना वायरस से सुरक्षा दे सकती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यूनिवर्सल वैक्सीन के एक डोज की कीमत एक डॉलर से कम हो सकती है. वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और शोधकर्ता डॉक्टर स्टीवन ने कहा, "वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन के हिस्से को निशाना बनाती है जो करीब सभी कोरोना वायरस में आम है."


यूनिवर्सल प्रायोगिक वैक्सीन निर्माण की दिशा में तैयारी 


प्रोसिडिंग्स ऑफ दी नेशनल एकेडमी ऑफ साइसेंस में ऑनलाइन प्रकाशित नतीजों के मुताबिक, जानवरों पर होनेवाले परीक्षण में कोविड वैक्सीन के इस्तेमाल से सूअरों को कोरोना वायरस के दो प्रकार से होनेवाली दो अलग-अलग बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा मिली. शोधकर्ताओं का कहना है कि एक कोविड-19 बीमारी का कारण बननेवाला कोरोना वायरस और दूसरा डायरिया की वजह बननेवाला वायरस था. दोनों कोरोना वायरस एक हद तक एक जैसे हैं, संभव है कि ये वैक्सीन कोविड-19 की विभिन्न किस्मों के खिलाफ विस्तृत सुरक्षा दे सकती है.


नोवल कोरोना वायरस के मुकाबले दूसरे कोरोना वायरस करीब 25 फीसद जुकाम की वजह बनते हैं और रोकथाम के लिए एक यूनिवर्सल वैक्सीन सबसे अच्छा माध्यम साबित होगी. जॉन हॉपकिन्स सेंटर फोर हेल्थ सिक्योरिटी, बाल्टीमोर के बुद्विजीवी डॉक्टर अमेश अदालजा बताते हैं कि ये नतीजे कोरोना वायरस की यूनिवर्सिल वैक्सीन को विकसित करने के लिए अद्भुत अवसर प्रदान करते हैं. नई वैक्सीन का दूसरा फायद कीमत को लेकर है. प्रायोगिक वैक्सीन आनुवांशिक रूप से परिष्कृत बैक्टीरिया पर आधारित है, जिसकी बड़े पैमाने पर तैयारी की लागत वर्तमान कोविड-19 वैक्सीन के मुकाबले बहुत कम होगी.


प्रायोगिक कोविड-19 वैक्सीन वेरिएन्ट्स से भी दे सकती है सुरक्षा


मिसाल के तौर पर एमआरएनए कोविड-19 वैक्सीन की वर्तमान लागत 10 डॉलर प्रति डोज है, जिसके चलते विकासशील देशों को इस्तेमाल करना आसान नहीं होगा. हैजा और कुकुरखांसी की रोकथाम के लिए बननेवाली बैक्टीरिया आधारित वैक्सीन की एक खुराक की कीमत एक डॉलर से भी कम होती है. शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन स्पाइक प्रोटीन को निशाना बनाएगी जो सभी वायरस में इंसानी कोशिकाओं पर हमलावर होनेवाला हिस्सा है. नोवल कोरोना वायरस के अब सभी जिनोम सिक्वेंस में पता चला कि कोविड-19 की वजह बननेवाला कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन के हिस्से में कोई बदलाव नहीं दिखा, और उम्मीद है कि भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा.


अगर नया लक्ष्य आगे के रिसर्च में प्रभावी साबित होता है, तब कोविड-19 वैक्सीन को तैयार करनेवाली कंपनियां संभावित तौर पर बूस्टर डोज तैयार कर सकेंगी. वर्तमान वैक्सीन इंसानी कोशिकाओं को कोविड स्पाइक प्रोटीन के अधूरे हिस्से पैदा करने पर मजबूर करती हैं, जिसका इम्यून सिस्टम रिस्पॉन्स करता है और भविष्य के हमले के लिए दीवार बनाता है. फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन मैसेंजर आरएनए के माध्यम से कोशिकाओं में जेनेटिक सूचना मुहैया कराती हैं, जबकि जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन में एडिनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है.


दोनों प्रकार की वैक्सीन कोशिकाओं में दाखिल होकर कोशिकाओं को वैक्सीन एंटीजेन बनाने को कहती हैं. इसके विपरीत प्रायोगिक नई वैक्सीन की तैयारी के लिए कई रणनीतियों पर अमल किया जा रहा है. ई-कोलाई बैक्टीरिया को आनुवांशिक तौर पर तैयार कर उन हिस्सों को हटा दिया गया है जो लोगों को बीमार करते हैं और उनकी जगह कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन को बैक्टीरिया की सतह पर निशाना बनाने के लिए रखा गया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती नतीजे हौसला बढ़ानेवाले हैं, लेकिन प्रायोगिक वैक्सीन पर अभी और ज्यादा काम करने की जरूरत है. वैक्सीन ने संक्रमण को नहीं रोका, बल्कि उसने सूअर को गंभीर लक्षण विकसित होने से सुरक्षा दी.


क्या आप हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं? अगर हां तो खाएं ये फूड और देखें असर


कोरोना काल में घर पर वर्कआउट करने का सिंपल तरीका, इन 3 एक्सरसाइज से बनाएं अपने शरीर को मजबूत



Source link
  • टैग्स
  • Coronavirus vaccine
  • कोरोना वायरस वैक्सीन
Facebook
Twitter
Pinterest
WhatsApp
पिछला लेखकोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2 लाख के पार, अप्रैल में अबतक 38000 से ज्यादा लोगों की गई जान
Team Hindi News Latest

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here